लखनऊ : वैसे तो देश के लिए कुर्बानी देने वालों के प्रति आभार व्‍यक्‍त करने का कोई खास दिन या महीना मुकर्र नहीं होता, फिर भी अगस्‍त का महीना क्रांतिकारियों का महीना माना जाता है। क्‍योंकि भारतीय स्‍वतंत्रता संग्राम के दौरान अगस्‍त में कई ऐसे घटनाएं हुईं जिससे इस मान्‍यता को बल मिला। 15 अगस्‍त 1947 को भारत को जादी मिली, इसी महीने काकोरी कांड के नायकों को सजा भी मिली। और तो और भारत को देश विभाजन का दंश भी अगस्‍त में ही मिला।  मसलन कुल मिला कर यह महीना जंग-ए-आजादी को याद करने का है।
   इसी कड़ी के तहत हम बात करने जा रहे हैं उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के झंडे वाला पार्क की। नगर की बीचोंबीच अमीनाबाद में स्थित इस पार्क का नाम झंडे वाला पार्क क्‍यों पड़ा इसे पीछे भी देश की आजादी से जुड़ी कई घटनाएं हैं।

   झंडेवाला पार्क से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं

इसी घंडेवाले पार्क में सबसे पहले 4 जनवरी 1931 को बारदौली दिवस मनाया गया। 
  12 जनवरी 1931 को स्‍वतंत्रता संग्राम आंदोलन से जुड़े चंद्रभानुगुप्‍त, परमेश्‍वरी दयाल और कैलाशपति वर्मा को इसी पार्क में अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया था।
  26 जनवरी 1931 को इसी पार्क में तमाम पाबंदियों के बावजूद स्‍वतंत्रता दिवस मनाया गया। झंडेवाला पार्क में ही जनवरी 1934 में महात्‍मा गांधी ने जनसभा को संबोधित किया था। 
  इसी जहग पर 1935 में कांग्रेस की स्‍वर्ण जयंती मनाई गई और तिरंगा झंडा फराया गया।
   लखनऊ के इसी झंडेवाले पार्क से 1936 में बाबा खिजर के नेतृत्‍व में जुलूस निकाला गया और सन 57 जिंदाबाद, तात्‍याटोपे जिंदाबाद, मौलबी अहमद उल्‍लाह जिंदाबाद के नारे लगाए गए। जबकि 1938 में  इसी पार्क में नेता जी सुभाषचंद्र बोस ने स्‍वदेशी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था। 
  यह वही पार्क है जहां 1940 में स्‍वतंत्रतादिवस समारोह मनाया गया। इसी पार्क में 1941 में जवाहर दिवस पर शिवराजवंती नेहरू ने महिला विद्यालय में हड़ताल करा कर महिलाओं के साथ पार्क झंडारोहण किया किया था। 
12 सितंबर 1942 को बाबू मोहन लाल सक्‍सेना यहीं पर जनरबंद हुए। 21 सितंबर 1942 में धारा 129 तोड़ने पर क्रांतिकारी आशालता की गिरफ्तारी हुई थी। 
   इसी झंडेवाला पार्क में 9 अगस्‍त 1943 में अंग्रेजों भारत छोड़ो का विशाल आयोजन किया गया। 1945 में पं: शिव नारायण द्विवेदी कई वर्ष के गुप्‍त स्‍वतंत्रता अभियान के बाद इसी पार्क में सबके सामने आए। 
   15 अगस्‍त 1947 को भारत राष्‍ट्र ध्‍वज फहरा कर अवध के लोगों ने जश्‍न-ए-आजादी मनाई थी।
  
 विरान-ए-गुलिस्‍तां बन कर रह गया है झंडेवाला पार्क
वेशक 1931 से 1947 तक सह पार्क भारतीय स्‍वतंत्रता संग्राम के इतिहास का गवाह रहा हो। लेकिन, अजा यह विरान-ए-गुलिस्‍ता बन कर रह गया है। हां इतना जरूर है कि इस पार्क में हाथ में राष्‍ट्र ध्‍वज तिरंगा थामे विशालकाय मूर्ति लोगों को अपनी गौरव गाथान सुना रही है। चाहे कोई सुने या ना सुने। 


   
   
Previous Post Next Post

Ads.

Ads.

Ads.