झरोखा न्‍यूज :  यह जान कर आप को हैरानी होगी काकोरी कांड के केस के दौरान एक ऐसी कालजयी रचना सामने आई जो क्रांतिकारियों का प्रसिद्ध गीत बन गई थी। 
काकोरी लूट केस के अभियुक्‍त लखनऊ जेल में कैद थे। केस चल रहा था। इसबीच बसंत पंचमी का त्‍योहार आ गया। सभी क्रांतिकारियों ने तय किया कि हम सभी इस दीन बसंती रंग की टोपी पहनेंगे। और हाथ में पीला रुमाल लेकर कोर्ट चलेंगे। उन्‍होंने अपने नेता रामप्रसाद बिस्मिल से कहा कि - पंडित जी । कल के लिए कोई चहती हुई कविता लिखें, उसे हम सब मिल कर गाएंगे। अगले दिन कविता तैयार हो गई। हम बता दें कि बिस्मिल उच्‍चकोटि के कवि भी थे।  आगे चल कर भगत सिंह ने इस गीत में चंद और कडि़यां जोड़ी, जब वह लाहौर जेल में बंद थे कर उसे आगे बढ़ाया और यह उनका प्रसिद्ध गीत बन गया। 
काकोरी केस की सुनवाई के दौरान ही रामप्रसाद बिस्मिल अजीमाबादी की यह गजल ' सरफरोसी की तम्‍मन्‍ना' जेल जाते हुए पुलिस की लॉरी में अदालत जाते हुए और अदालत में मजिस्‍ट्रेट को चिढ़ाते हुए गाया करते थे। बिस्मिल के बलिदान के बाद यह रचना सभी क्रांतिकारियों की मंत्र बन गई थी। 

Previous Post Next Post

Ads.

Ads.

Ads.