चीनी प्रशासन ने अपने देश की मुस्लिम आबादी के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. चीन की राजधानी बीजिंग में इस्लामी प्रतीकों को हटाया जा रहा है. चीन सरकार ने हलाल रेस्टोरेंट, फूड स्टाल, अरबी में लिखे शब्दों और दूसरे इस्लामिक प्रतीकों का नामो-निशान मिटाने का आदेश दिया है.


मस्जिदों की शैली में भी हो रहा है बदलावइस अभियान के तहत देश की कई मस्जिदों पर मध्य-पूर्वी शैली के गुंबदों को तोड़कर उन्हें चीनी शैली के पगोडा में तब्दील किया जा रहा है. चीन में लगभग 2 करोड़ मुस्लिम रहते हैं. वैसे तो वहां धार्मिक स्वतंत्रता है, लेकिन सरकार हर नागरिक को कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा मानने के लिए बाध्य कर रही है. यह अभियान सिर्फ मुस्लिमों के खिलाफ नहीं चलाया जा रहा है, बल्कि चर्चों पर भी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं.

2009 में हुए थे दंगेचीन के शिनजियांग प्रांत में 2009 में उइगर मुस्लिमों और चीनी नागरिकों के बीच दंगे भड़क गए थे. इसके बाद चीन ने आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया, जिसमें आरोप लगा कि सरकार मुस्लिमों पर अत्याचार कर रही है. चीन के इस कदम की पश्चिम देशों में भी खूब आलोचना होती रही है. हालांकि चीन धार्मिक चरमपंथ को रोकने के लिए इसे जरूरी बताता रहा है.
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