लुधियाना, नवांशहर, जालंधर कपूरथला, पठानकोट : भारी बारिश और बाढ़ ने इन दिनों पंजाब में कहर मचाना शुरू कर दिया है। भाखड़ा से पानी छोड़ जाने और हिमाचल में हुई भारी बरसात से सतलुज, रावी और व्‍यास इन दिनों उफान पर है। सतलुज का पानी तो खतरे के निशान को पार कर गया है।  प्रदेश के सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं अब तक पांच से अधिक लोगों की जान  चल गई है। भाखड़ा डैम से छोड़े जा रहे पानी के कारण सतुलज दरिया उफान पर है। 
रोपड़, पठानकोट, लुधियाना और फिरोजपुर के गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। फिरोजपुर, जालंधर, नवांशहर और कपूरथला के 197 गांवों को खाली करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह आदेश भाखड़ा डैम से सतलुज दरिया में एक लाख 89 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के मद्देनजर दिया गया है। देर रात तक जिला प्रशासन के अधिकारी हालात का जयजा लेते रहे। स्वां नदी ने श्री आनंदपुर साहिब के दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। गांव निक्कूवाल, महंदली कलां, बुर्ज, चंदपुर बेला, बल्लोवाल, गज्जपुर, हरीवाल आदि का संपर्क दुनिया से टूट गया। यहां बचाव में एनडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं। वहीं हिमाचल में भारी बरसात के बाद पठानकोट में चक्की दरिया पूरे उफान पर है। रविवार सुबह तड़के चक्की दरिया किनारे वाली भदरोया रोड का 300 मीटर हिस्सा दरिया में समा गया। सड़क किनारे लगे बिजली के 2 टावर भी धराशायी हो गए।

24 घंटों में अनुमान से अधिक पानी आया
बीबीएमबी के चेयरमैन अभियंता दविंदर शर्मा ने कहा है कि भाखड़ा डैम के पीछे बनी विशाल गोबिंद सागर झील में पिछले 24 घंटों के दौरान हमारे अनुमान से दो गुना पानी आया है। शर्मा ने कहा कि बीते 24 घंटों के दौरान झील में 3 लाख 11 हजार 134 क्यूसेक पानी आया जिसके चलते भाखड़ा डैम का जलस्तर 1679 फुट के पार चला गया है। उन्होंने कहा कि 1988 के बाद यह पहली बार हुआ है कि इतनी भारी मात्रा में पानी आया है। पंजाब में बारिश रुकने पर भाखड़ा डैम से छोड़े जाने वाले पानी की रफ्तार को और बढ़ाया जा सकता है।  

रणजीत सागर बांध भी लबालब
रणजीत सागर बांध (आरएसडी) की झील से माधोपुर हेड वर्क्स के जरिये पाकिस्तान की ओर पानी नहीं छोड़ा गया। नतीजतन झील का जलस्तर खतरे के निशान पर है। शाम 5 बजे तक झील का जलस्तर 521.80 मीटर पहुंच गया था। अगर ऐसे ही हालात रहे तो सोमवार को फ्लड गेट खोलने पड़ेंगे। आरएसडी के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर नरेश महाजन ने बताया कि चमेरा बांध प्रशासन ने 3 फ्लड गेट खोल रखे हैं। जिसके चलते हर घंटे आरएसडी झील में 80 हजार क्यूसेक पानी जमा हो रहा है।
 पठानकोट में चक्की दरिया किनारे वाली भदरोया रोड का 300 मीटर हिस्सा दरिया में समा गया, वहीं सड़क के किनारे लगे बिजली के बड़े-बड़े 2 टावर भी तिनकों के समान धराशायी हो गए। टावरों के तार पठानकोट-जम्मू नेशनल हाइवे पर बिखर गए। तड़के 4 बजे के करीब ट्रैफिक कम होने के चलते कोई इनकी चपेट में नहीं आया। पठानकोट-जालंधर हाइवे भी अवरुद्ध हो गया। हाइवे पर हाई वोल्टेज तार के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी लंबी कतारें लग गईं। 
सतलुज  खतरे के निशान से पार
रोपड़ से आ रहे लगातार पानी के कारण सतलुज दरिया रविवार को खतरे के निशान को पार कर गया। हालात यह हैं कि कई जगह पर पानी दरिया के किनारों को छूने लगा है। शनिवार को भाखड़ा से सतलुज में पानी छोड़ा गया था। शाम तक दरिया में 81 हजार क्यूसेक पानी बह रहा था। हालांकि ड्रेनेज विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि लगभग 20 दिन पहले इस दरिया में 58 हजार क्यूसेक पानी बह चुका है इसलिए खतरे की कोई बात नहीं है। रविवार को दरिया का रौद्र रूप बढ़ता जा रहा है। इन दोनों नदियों से लगभग 1.50 लाख क्यूसेक पानी पहुंचा है इसलिए रोपड़ हेड से और पानी सतलुज में छोड़ा जा रहा है। 
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