दिल्‍ली : लंबे समय से बीमार चल रहे पूर्व केंद्रीय वित्‍तमंत्री अरुण जेटली का शनिवार दोपहर करीब 12 बजे निधन हो गया। वह 66 वर्ष के थे।  दिल्‍ली के श्रीराम कॉलेज से कामर्स स्नातक रहे अरुण जेटली कभी चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहते थे। उन्होंने परीक्षा भी दी थी। चार्टर्ड अकाउंटेंट तो नहीं बन पाए पर छात्र नेता से हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित वकील बने अरुण जेटली अटलबिहारी वाजपेई की सरकार में कानून मंत्री और फिर 2014-2019 तक मोदी सरकार में वित्‍तमंत्राल बागडोर संभालते रहे। जेटली को मोदी कैबिनेट का ताकतवर मंत्री माना जाता था। बताया जा रहा है जेटली का अंतिम संस्‍कार कल किया जाएगा। 
अरुण जेटली का पूरा नाम अरुण महाराज किशन जेटली है। 66 साल के अरुण जेटली की छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि रही और 1973 के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर कालेज के विद्यार्थी जेटली ने श्रीराम कॉलेज से बीकाम किया था। इसके बाद वह दिल्ली विश्वविद्यालय से 1977 में लॉ ग्रेजुएट किया। इस दौरान वह  वह अखिल भारतीय विद्याथी परिषद से भी जुड़े थे। और1974 में वह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए ।
80 के दशक में अरुण जेटली ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में बतौर वकील अपनी पहचान बनाई। जनवरी 1990 में वह दिल्ली हाईकोर्ट के नामित वरिष्ठ अधिवक्ता बने। 1989 में तत्कालीन वीपी सिंह की सरकार ने जेटली को देश का एडिशनल सॉलीसीटर जनरल बनाया। वकालत के कॉरियर में जेटली शरद यादव (तब जनता दल), लालकृष्ण आडवाणी (भाजपा), माधव राव सिंधिया (कांग्रेस) के वकील रहे। जनवरी 2019 में साफ्ट टिश्यू कैंसर की चपेट में आ गए और तबसे उनका स्‍वास्‍थ्‍य लगातार गिरता जा रहा था। 
जेटली के निधन पर प्रधान मंत्री नेंद्र मोदी, उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ, बिहार के मुख्‍यमंत्री नितीश कुमार, झारखंड के मुख्‍यमंत्री रघुबर दास, हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित कई भाजपा नेताओं व अन्‍य दलों के नेताओं ने शोक जताया है। बता दें कि पिछले एक साल में भाजपा ने मनोहर पर्रिकर, सुषमा स्‍वराज और अरुण जेटली सहित  कई दिग्‍गज नेताओं को खोया है। 
अमृतसर से था गहरा रिश्‍ता
उल्‍लेखनीय है कि वर्ष 2014 में वह अमृतसर से भाजपा के टिकट पर पहली बार  लोकसभा चुनाव लड़े और कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह से चुनाव हार गए। यहां बाहरी का मुद्दा उठने पर उन्‍होंने अमृतसर में मकान भी खरीदा था। चुनाव हारने के बाद भी उनके परिवार का यहां आनाजाना लगा रहा। पंजाबी खाने की शौकीन अरुण जेटली को अमृतसर से काफी लगावा था।  जेटली को अमृतसारी नॉन, छोले-भटूरे, छोले-कुल्चे बेहद पसंद थे। 

Previous Post Next Post

Ads.

Ads.

Ads.