अमृतसर: हर मां-बाप का सपना होता है कि उनकी संतान बेहतर एजूकेशन के लिए विदेश जाए। इस सपना को साकार करने के लिए अब मार्कीट में फर्जीवाड़ा करके इस गोरख धंधे को चलाने वाला पूरा नैटवर्क है।यहां तक की अमीर घरानों के पढ़ाई में कमजोर बच्चों को विदेशी धरती पर पहुंचाने के लिए एक ऐसा नैटवर्क है जो कि उत्तर भारत में आइलैट्स की परीक्षा देने वालों के स्थान पर दूसरे बच्चों को बिठाकर पेपर दिलाते हैं और इसके बदले मेधावी विद्यार्थियों को 30 से 50 हजार में पेपर देने के लिए राजी कर लेते हैं। इस फर्जीवाड़ा में आइलैट्स सैंटर के साथ-साथ जिन स्थानों पर पेपर दिलाए जाते हैं उनकी मिलीभगत अब तक सामने आई है। अमृतसर में बीते 45 दिनों में अलग-अलग 3 मामलों में 25 लोगों को दबोचा गया है, जिसमें एक लड़की भी शामिल हैं। इन 25 लोगों में पेपर देने वाले फर्जी विद्यार्थियों के साथ-साथ पेपर दिलाने वाले ‘दलाल’ के साथी शामिल हैं।

बात अमृतसर की करें तो यहां पर आइलैट्स के पेपर जहां-जहां दिलाए जाते हैं वहां-वहां ‘सांठ-गांठ’ करके उन बच्चों को आइलैट्स क्लीयर करवाने के लिए प्लाङ्क्षनग की जाती है जिन्हें विदेश भेजने के लिए आइलैट्स सैंटर व ट्रैवल एजैंट 15 से 20 लाख रुपए वसूलते हैं। हालांकि इन रकम में विदेशी यूनिवर्सिटी या शिक्षण संस्थानों की सालाना फीस भी शामिल होती है। कुल मिलाकर आइलैट्स क्लीयर करवाने के लिए मोटी रकम ली जाती है, और इस सारे नैटवर्क के संचालन में पंजाब के तार दिल्ली से लेकर एन.सी.आर. तक जुड़े हैं। ‘पंजाब केसरी’ को मिली जानकारी के अनुसार पंजाब के ग्रामीण इलाकों से ऐसे परिवार इन जालसाजों के हत्थे चढ़ रहे हैं जो मुंह मांगी कीमत देकर अपने बच्चों को विदेशों में सैटल करना चाहते हैं। पुलिस भी मान रही है कि आइलैट्स के पेपर क्लीयर करवाने के लिए बड़े ही सटीक प्लाङ्क्षनग से काम किया जा रहा था, जिसे पुलिस ने खुलासा करके इस नैटवर्क को बेनकाब किया है।  


‘आइलैट्स’ में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पुलिस ने बनाया नैटवर्क : ए.डी.सी.पी
ए.डी.सी.पी. टू लखबीर सिंह कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में पंजाब से विदेशी धरती पर एजूकेशन वीजा (स्टडी वीजा) पर जाने वाले बच्चों की गिनती तेजी से बढ़ी है। उन्हें जानकारी मिली थी कि आइलैट्स के पेपर क्लीयर करवाने के लिए उक्त गिरोह असली बच्चों के स्थान पर ऐसे बच्चों से पेपर दिलाते हैं, जिनका चेहरा असली कैंडीडेट्स से मिलता है। ऐसे बच्चों को ढूंढने के लिए नैटवर्क पूरा इंतजाम करता है। अब तक अलग-अलग 3 छापामारी में 25 लोगों के नाम सामने आए हैं, इनमें फर्जीवाड़ा से जुड़े लोगों के साथ-साथ वो बच्चे भी हैं जो दूसरे बच्चों के स्थान पर आइलैट्स के पेपर देते हैं। इस फर्जीवाड़ा में जिन बच्चों से पेपर दिलाए जाते हैं उन्हें बोलचाल के तौर पर ‘शूटर’ कहा जाता है। 
बिना ‘लाइसैंस’ चल रहे आइलैट्स सैंटरों की खैर नहीं 
ए.डी.सी.पी. टू लखबीर सिंह कहते हं कि बिना लाइसैंस चल रहे आइलेट्स सैंटरों की खैर नहीं, वही काम करेगा जिसके पास जिला प्रशासन (डी.सी. आफिस) से लाइसैंस जारी हुआ है। बॉलीवुड फिल्म ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’ में तो संजय दत्त ने हाइटेक विधि का इस्तेमाल करके परीक्षा पास की थी, लेकिन यहां तो कमाल ही हो गई, आइलैट्स क्लीयर न कर पाने वाले बच्चों के स्थान पर दूसरे पेशेवर विद्यार्थियों (शूटरों) से परीक्षा दिलाने के इस गोरखधंधे की जड़ों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग पुलिस टीमें काम कर रही हैं। 
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