सिद्धार्थ मिश्र की कलम से :  दोस्‍तों दुनिया में किसी धर्म, संप्रदाय अथवा जाति के लोग रहते हों। लेकिन उनकी दिन की शुरुआत अपने इष्‍टदेव की आराधना से होती है। हर कोई चाहता है कि उसका दिन मंगल और शुभ हो।
हिंदू धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य सर्व प्रथम गणपति की पूजा से आरंभ किया जाता है। क्‍योंकि भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का देवता कहा गया है। उन्‍हें मंगल मूर्ति भी कहते हैं । इसलिए, यह जानलेना आवश्‍यक हो जाता है कि इनकी पूजा में कौन सा फूल चढ़ाया जाये कि वो अपने भोले भक्‍त पर शिघ्र प्रसन्‍न हों। वेसे तो गणेशजी को प्रकृति प्रदत्‍त सभी पत्र एवं पुष्‍प चढ़ाये जा सकते हैं, लेकिन पद्मपुराण, आचार्यरत्‍न एवं कार्तिक महात्‍म्‍य के अनुसार गणपति पर तुलसी पत्र कभी नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। गणेशपुराण में बताया गया है कि इनकी पूजा में सफेद या हरी दूब अवश्‍य चढ़ानी चाहिए। दूब तोड़ते समय यह ध्‍यान रखना चाहिए कि इनकी फुनगी में या पांच पत्तियां अवश्‍य हों।

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