श्री राम नाटक क्लब भरोली कलां 47 वर्षाें से कर रही श्री राम लीला का आयोजन
राम-लक्ष्मण को राक्षसों का बध करने के लिए जंगलों में भेजते राजा दशरथ।
पठानकोट : श्री राम लीला नाटक क्लब के प्रधान ठाकुर विजय सिंह कौहाल का कहना है कि वर्ष 1969 में हमारे बुजुर्गों की और से ड्रामे शुरू किए गए। 1972 तक क्लब की और से हर वर्ष केवल जैदरथ व सुलताना डाकू चार ड्रामे किए जाते थे। 1973 में क्लब के सरप्रस्त सिद्वार्थ राम व राम नाथ जोगी ने ड्रामा की बजाय दस दिनों तक राम लीला करने का फैसला किया गया। उस समय की राम लीला में जितने सदस्य हुआ करते थे उसमें से धीरे-धीरे सभी कलाकार साथ छोड़ गए। क्लब का निमाण करने वाले सदस्यों में से आज कोई भी इस दुनिया में नहीं है। दूसरी पीड़ी नई पीड़ी के साथ बखूबी अपनी जिम्मेवारी को निभा रही है। 1972 में पहली बार सिद्वार्थ राम ने रावन की भूमिका निभाई। इसके बाद उन्हें अगले वर्ष अपने घरेलू समस्या के कारण मुझे रावन बनने का मौका मिला और 43 वर्षों तक अपने किरदार को बखूबी निभाया। इस दौरान उनके पिता स्वर्गीय हरबंस सिंह ने उन्हें  साल 1982 के काम काज के सिलसिले में विदेश भेज दिया। छह महीने तक वहां बखूबी काम किया परंतु भारत में जब नवरात्रों शुरू हुए तो उनका मन कामकाज में नहीं लगा। इस बार 29 सितंबर को राम लीला क्लब की ओर से पहली नाइट का आयोजन किया जाएगा।
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