ओम रतूड़ी, ऋषिकेश ( उत्तराखंड)  योग सिटी ऋषिकेश के परमार्थ आश्रम में श्रद्धालुओं ने  प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प लिया ।
परमार्थ निकेतन में हुई सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर सोमवार को जहां, लोगों ने परमार्थ गंगा तट पर पंडित देवेश दीक्षित के मुखारविन्द से श्री मद् भागवत्  कथा का अमृतपान किया वहीं परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने माँ गंगा के पावन तट और भगवान नीलकंठ की धरती का महात्म्य बताते हुये श्रद्धालुओं को धरती को प्रदूषण मुक्त करने और एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प कराया। इससे पूर्व भगवत कथा मर्मज्ञ पण्डित  देवेश दीक्षित  के मुखारविन्द से भक्तों ने सात दिनों तक भक्ति, ज्ञान, और भगवान की स्नेहमयी लीलाओं का  ने अमृतपान किया । स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने कथा वाचक व्यास और कथा आयोजकों को संकल्प कराया कि प्रत्येक कथा के पश्चात हर व्यक्ति कम से कम 11-11 पौधों का रोपण करें। उन्होने सभी से कहा कि आईये हम अपने पर्यावरण से, नदियों से, जलाशयों से; वृक्षों से और अपनी धरती माता से प्रेम करे और स्वच्छ और हरित वातावरण के निर्माण का संकल्प लें।  हर कथा से एक नयी शुरूआत करें। देव पूजन के साथ वृक्ष पूजन भी करें और हर परिवार 11 पौधों के रोपण के साथ कम से कम एक-एक वृक्ष गोद लें और उसका संरक्षण करें तभी हम अपने पर्यावरण को बचा सकते है।
परमार्थ निकेतन में कथा के अवसर पर कथा यजमान परिवार की तीन पीढ़ियां और आठ परिवारों के सदस्य उपस्थित थे, स्वामी चिदानन्द ने सभी को संकल्प कराया और कहा कि हमारे बच्चे बदलेगे तो परिवार बदलेगा और आने वाली पीढ़ियां बदलेगी। परिवार बदलेगा तो पर्यावरण बदलेगा अतः हम अपने बच्चों को संस्कार दे और धार्मिक कार्यो के लिये आगे लाये।
इस अवसर पर आयोजक  राजकुमार सिंगल, डाॅ रामबाबू सिंगल,  सुगनचन्द्र फरमानिया,  मनोज सिंगल,  मुकेश सिंगल,  पवन कुमार सिंगल,  जय भगवान फरमानिया,  संजय सिंगल, सिंगल और फरमानिया परिवार के अनेक सदस्य, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार और अन्य भक्तगण उपस्थित थे।
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