सिद्धार्थ मिश्र की कलम से : दोस्‍तों में हिंदू धर्म के अनुसार श्रृष्‍टी के नियंत्रण करने वाले तीन देवों में भगवान शिव को सर्वोपरि माना गया है। इनकी सत्‍ता को सबने एक मत से स्‍वीकार किया है। चाहे वह देव हो या दानव। नर हों या किन्‍नर। सबने इन्‍हें अपना आराध्‍य माना है। तभी दुनिया के सर्वाधिक मंदिरों में भगवान शिव के मंदिरों की संख्‍या अधिक है। 
कहा जाता है कि भगवान शिव बहुत जल्‍दी प्रसन्‍न होते हैं। पौराणिक कथाओं में ऐसी कथाएं जिसमें भगवान शिव का दिया गया वरदान उन्‍हीं के लिए संकट का कारण बन गया है। इसी लिए इन्‍हें भोले नाथ भी कहा जाता है। इसलिए भगवान भोलेनाथ की पूजा से पहले यह जान लेना जरूरी है कि इन्‍हें कौंन सा फूल प्रिय है और कौन सा नहीं।      
भगवान शिव पर फूल चढ़ाने का बहुत अधिक महत्‍व है। वीरमित्रोदय में भगवान शिव के बारे में बताया गया है कि सर्वगुण सम्‍पन्‍न किसी ब्राह्मण को स्‍वर्ण मुद्राएं दान करने पर जो पुण्‍य अर्जित होता है वह भगवाना शिव पर सौ पुष्‍प चढ़ा देने मात्र से प्राप्‍त हो जाता है। इन पर केतकी एवं केवड़ा के फूलों को भूल कर भी नहीं चढ़ाना चाहिए। इन फूलों को छोड़ भगवान शिव को सभी तरह के फूल प्रिय हैं। खासतौर से मंदार और शमी का फूल। यदि इन छोटी सी बातों का ध्‍यान रखें तो हमारी आराधन शीघ्र सफल होगी।
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