अमृतसर जोड़ा फाटक रेल हादसे की फाइल फोटो।


अमृतसर : साल बदला, कैलेंडर की तारीखें बदली और दशहरा आ गया। फर्क इतना ही है कि इस साल 19 अक्‍टूबर नहीं 8 अक्‍टूबर को दशहरा है। लेकिन साल बाद भी रेल हादसे के लोगो को न तो न्‍या मिला है और ना ही इलाज। जो नेताओं और सरकारी नुमाइंदों पीडि़यों से किए थे।

 उल्‍लेखनीय है कि  पिछले साल दशहरे वाले दिन, 19 अक्टूबर 2018 को जोड़ा फाटक पर हुए रेल हादसे में 70 से अधिक लोग मारे गए थे। उस दौरान मृतकों के  परिवारों के एक-एक सदस्य को पंजाब सरकार ने नौकरी देने का वादा किया था।  लेकिन यह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। मृतकों के परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं।

  हादसा पीडि़तों का आरोप है कि  गत 11 महीनों में नौकरी के लिए इनसे 4-5 बार फार्म तो भरवाए गए, मगर मिला कुछ नहीं। इन परिवारों ने हादसे में अपने उन सदस्यों को गंवाया जिनके बूते परिवार का खर्च चलता था। आज ये परिवार एक दम से सड़क पर आ गए हैं। इन परिवारों का अरोप है कि हादसे के बाद राज्‍य सरकार ने प्रत्‍येक पीडि़त को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा दिया। केंद्र ने भी 2-2 लाख का मुआवजा दिया है।
हालांकि कई परिवारों को केंद्र की मुआवजा राशि अभी तक नहीं मिल पाई है। पीडि़तों का कहना है कि   महीनों की दौड़-धूप के बाद इन्हें जो मुआवजा राशि मिली, उसका बड़ा हिस्सा उधार चुकाने में चला गया।  मुआवजा राशि दिलाने के नाम पर भी कई लोगों ने इन्हें ठगा।  इन्हें अब सिर्फ सरकारी नौकरी ही सहारा दिख रही है लेकिन पंजाब सरकार तो नौकरी देने की बात ही नहीं कर रही।
हताश लोगों को ने सिद्धू की कोठी पर किया प्रदर्शन
सरकारी और राजनीतिक वादा खिलाफी का शिकार हुए लोगों ने पूर्व स्‍थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिद्धू के आवस का घेरा व उन्‍हें सबसे बड़ा झूठा करार दिया।  हादसा पीडि़त दीपक कुमार, मोनिका, बिमला आदि ने कहा कि हादसे के बाद नवजोत सिंह सिद्धू और उसकी पत्‍नी ने लोगों को गोद लेने, नगर निमग सहित अन्‍य विभागों में आश्रित परिवारों के एक सदस्‍य को नौकरी देने और इलाज का खर्च देने का वादा किया था। लेकिन माला शांत होने के बाद मुआवजा क्‍या देना एक बार भी मुड़ पूछने तक नहीं आया।
बतादें कि इस दुर्घटना में मेला के आयोक मिट्ठू मदान सहित नवजोत सिंह सिद्धू की पत्‍नी डा: नवजोत कौर को भी जिम्‍मेदार ठराया गया था। क्‍योंकि वो दशहरा मेले में मुख्‍य अतिथि थी और उन्‍होंने ने ही रावण का पुतला जलाया था।
जांच के नाम पर हुई लीपापोती
रेल हादसे में जान गंवा चुके अपने बेटे नीरज तस्‍वीर लिए रटा और कृष्‍णा की मां बिमला रानी ने रोते हुए कहा कि उन्‍हें न्‍याय क्‍या मिलना। जांच के नाम पर पंजाब सरकार ने केवल लीपापोती कर अपने चहेते नेताओं को बचाया है। क्‍योंकि सिद्धू भी उसका था और उसकी घरवाली भी । सारे आरोपी बरी हो गए किसी को कोई सजा नहीं नहीं। सजा तो हम भुगत रहें है। इलाज का वादा भी किया था सिद्धू ने और उसकी सरकार ने क्‍या हुआ कुछ नहीं मिला। कई लोगों का इजाल अधूरा है।  तो कुछ ने अपना सबकुछ बेच कर दवा करवा रहे हैं।
रोते हुए मृतकों के परिजनों की फाइल फोटो।


उत्‍तर प्रदेश और बिहार के लोग भी मारे गए थे
पिछले साल हुए रेल हादसे में मारे गए 70 से अधिक लोगों में उत्‍तर प्रदेश, बिहार, मध्‍य प्रदेश के लोग भी सामिल थे। इसमें गाजीपुर जिले के करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के गांव बगेंद का युवक भी शामिल था जो दिल्‍ली से अपने भाई के पास मेला देखने आया था। बिहार की रजनी भी थी जो अपने पति और बच्‍चों के साथ रेल ट्रैक पर खड़ी हो कर रावण के जलते हुए पुतले को देख रही थी। कि अचानक उसका पति दो बच्‍चे भी ट्रेन से कटने वालों में शामिल थे। इसमें जोड़ा फाटक वह युवक भी था जो रामलीला में रावण बनता था।
सिद्धू दंपति शहर से बाहर
हादसा पीडि़त सिद्धू के दरवाजे पर जा कर बार-बार न्‍याय की गुहार लगा रहें है, लेकिन उनके कोठी का दरवाजा बंद है। घंटो नारेबाजी के बाद सुरक्षा कर्मी बाहर निकलते हैं और कहते हैं साहब नहीं है। जब आएंगे तब आ जाना। यह क्रम पिछले कई दिनों से चल रहा है। लेकिन सिद्धू हैं लोगों के आंसू पोछने तक को तैयार नहीं है। इस समय तमाम नेता और तथाकथित स्‍वयंसेवी संगठन भी खामोश हैं जो उस समय उनको गोद लेने और तमाम जरूरतों को पूरा करने का आश्‍वासन दे रहे थे।
तीन बार सर्वे कराए, मिला कुछ नहीं
आंसू पोछती हुई लवली कहती हैं - हादसे में  उनके 19 साल के बेटे तरुण की मौत हो गई थी। अब तो समझ नहीं आ रहा  कि जीएं तो किसके लिए। सरकार के नुमाइंदे तीन बार सर्वे करके जा चुके हैं, लेकिन न तो आज तक कोई नौकरी देने आया है और न ही हाल पूछने। दीपक कुमार ने कहा कि रेल हादसे में उसके पिता और चाचा दोनो की मौत हो गई थी। उस समय सरकार ने करने को बहुत कुछ कहा पर किया कुछ नहीं।


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