लखीमपुर : जरा सोचिए कंधे पर जिगर के टुकड़े का शव रख जब एक पिता मात्र इस लिए भटक रहा हो कि उसे अपने मृत बेटे का मृत्‍यु प्रमाण पत्र चाहिए। वह भी इस लिए उसके अबोधे बेटे की अस्‍पताल में मौत हो गई थी। वह यहां आया तो था बीमार बेटे के इजला के लिए, लकिन उसे क्‍या पता कि यहां उसके बेटे की मौत हो जाएगी। उसे यह भी नहीं पता कि बेटे की मौत के साथ यहां व्‍यवस्‍था की मौत हो चुकी है, जिस अस्‍पताल प्रशासन और सरकार ने बनाया है। तभी तो उसे अपने मृत बेटे के शव को लेकर कभी इस बाबू के पास तो कभी उस बाबू के पास दौड़ना पड़ा क्‍योंकि उसे उसी के मृत बेका मृत्‍यु प्रमाण पत्र चाहिए जिसकी बेजान लाश वह अपने कंधे पर ढो रहा था। 
 ऐसा ही कुछ मंजर उत्‍तर प्रदेश के लखीमपुर के जिला अस्‍पताल में देखने को मिला। जहां मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए एक पिता अपने बेटे के शव को कंधे पर लेकर घंटो  इधर-उधर भटक रहा था।  लोगों से मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन वहां उसकी सुनने वाला कोई नहीं था। घंटों की मशक्कत के बाद जब उसे प्रमाणपत्र मिला तो वह दहाड़े मार-मार कर रोने लगा। 
नीमगांव थाना इलाके के रमुआपुर गांव निवासी दिनेशचंद्र के चार वर्षीय बेटे दिव्यांशु को बुखार की शिकायत पर जिला अस्पताल लाया गया। बुधवार को उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि उसे मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाना होगा। बेटे की मौत से आहत पिता को कुछ सूझ नहीं रहा था। उसके साथ कोई घर का सदस्य भी नहीं था। वह कंधे पर बेटे को शव को उठाए इधर-उधर भटकने लगा।  
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