पठानकोट : जम्‍मू-कश्‍मीर और हिमाचल प्रदेश की सीमाओं से सटा पंजाब का एक छोटा का जिला पठानकोट जितना खुबसूरत है, उतनीही खुबसूरती यहां की रामलीलाओं में हैं।  पठानकोट में करीब दर्जनभर रामलीला कमेटियां हैं। और इन कमेटियों के सदस्‍य भी अपने आप में खास हैं और रामलीला के किरदार भी। इन रामलीलाओं में राम से लेकर रावण तक के किरदार विधायक, मंत्री और इंजीनियर निभाते हैं। संवाद अदायगी पर भी चार भाषाओं (हिंदी, पंजाबी, हिमाचली और डोंगरी) की छाप दिखाई देती है।
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   यदि हम बात करें पठानकोट के भरोली के श्रीरामलीला नाटक क्‍लब की तो इसका इतिहास करीब 47 साल पुराना है। इसके फाउंडर सदस्‍य सिद्धार्थ राम आरएमएस के सुपरिंटेंडेंट थे। जबकि, क्‍लब के मौजूदा प्रधान विजय सिंह ठाकुर एनआरआई हैं। वहीं रामलीला क्‍लब के सदस्‍यों दर्शन लाल जीआरपी के रिटायर्ड कमांडेंट है। 


नफरत तो सिर्फ मंच पर, हमारे आराध्‍य हैं राम
श्रीरामलीला नाटक क्‍लब भरोली कलां में करीब सात वर्ष से रावण का किरदार निभा रहे अश्‍वनी शर्मा कहते हैं कि उनके राम  आदर्श हैं। भारतीय रेलवे में बतौर जेई रावण यानी अश्‍वनी शर्मा इस समय कटरा में तैनात हैं। वे कहते हैं उनके तो रोम रोम राम बसे हैं। नफरत को सिर्फ मंच पर करता हूं। रामलीला में रावण बनने के लिए हर साल दस दिन की छुट्टी लेकर पठानकोट आते हैं। भले ही उनकी ड्यूटी कटरा में हो या कटकपुर में। 


यहां विधायक और मंत्री तक बनते थे राम और रावण
इसी तरह पठानकोट सिटी के रामा ड्रामाटिक क्‍लब काली माता मंदिर की रामलीला में विधायक से लेकर मंत्री तक राम और रावण का किरदार निभाते हैं। कई वर्षों तक रावण का किरदार निभाने वाले पंजाब सरकार के पूर्व परिवहन मंत्री 75 वर्षीय मास्‍टर मोहन लाल बेशक बढ़ती उम्र के साथ कोई चरित्र नहीं निभा रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे से चरित्र को निर्देश जरूरी देते हैं। इसी क्‍लब के 62 वर्षीय पूर्व कांग्रेसी विधायक अशोक शर्मा राम की भूमिका निभाते थे। कहा जाता है कि जब इन दोनों नेताओं का मंच पर राम और रावण के किरदार में आमना सामना होता था तो लोग कते थे, यह कांग्रेस और भाजपा की जंग है। बेशक अब ये दोनों कलाकार मंच पर सक्रिय नहीं हैं, लेकिन रामलीला कमेटी से आज भी जुड़े हैं। 
   
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