-रामलीला मंचन के दौरान ताड़का बने 21 वर्षीय अंकित उपाध्‍याय के कपड़ों में लग गई थी आग
-रामलीला कमेटी के पास आग बुझाने के नहीं थे प्रबंध, चंद मिन्‍टों में 80 प्रतिशत झुलस गया था अंकित
-दिल्‍ली के सफदरजंग अस्‍पताल में विजयदशमी से एक दिन पहले ही हो गया अंकित का निधन

 मुजफ्फरनगर: आखिरकार जिंदगी जंग लड़ रही 'ताड़का' विजय दशमी से एक दिन पहले मौत से हार गई। उल्‍लेखनीय है कि करीब एक सप्‍ताह पहले रामलीला के मंच पर ताड़का अभिनय करते वक्‍त अंकित उपाध्‍याय के कपड़ों में आग लग गई थी। इससे वह मंच पर ही गंभीर रूप से झुलस गया था। अंकित को जानने वालों का कहना है उसे अभिनय का बेहद शौक था और यही शौक उसे मौत मोहाने तक खींच लाया। अंकित के पड़ोसियों का कहना है कि वह रामलीला में किरदार निभाने के लिए ड्रेस भी खुद के पैसों से ही खरीदता था। अंकित की मौत की सूचना मिलते ही प्रदेश के राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल गांधीनगर उसके आवास पर पहुंचे और परिजनों को ढाढस बढाई। उन्होंने फौरी राहत के तौर पर अपनी ओर से परिवार को 25 हजार रुपये दिए और आश्वासन दिया कि सरकार की ओर से वह परिवार की आर्थिक मदद कराएंगे। 
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मुजफ्फरनगर के  गांधीनगर निवासी 21 वर्षीय अंकित पिछले चार-पांच सालों से रामलीला में कई पात्रों का अभिनय कर रहा था।  बताया जा रहा है कि अंकित  एसडी कॉलेज का बीए का छात्र था। और तीन भाइयों में मंझला था। अंकित की मौत से उसके पिता कृष्णपाल के पिता सहित पुरा परिवार सदमें में है। बताया जा रहा है अंकित केवल रामपुरी की रामलीला में ही मंचन करता था, लेकिन इस बार वह कच्ची सड़क की रामलीला ताड़का की भूमिका निभा रहा था।  इसके  अगले ही दिन उसे रामपुरी की रामलीला में उसका रोल था। 

बता दें कि गत सप्‍ताह  ताड़का की भूमिका निभाते समय उसके कपड़ों में आग लगई थी और वह स्टेज पर ही तड़पने लगा। आग बुझाने के लिए रामलीला कमेटी के पास कोई प्रबंध नहीं था। और अंतिक 80 प्रतिशत जल गया। जिला चिकित्सालय के बाद मेरठ और इसके बाद दिल्ली सफदरजंग में उसका इलाज चला। सात दिन तक वह जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा और रविवार की सुबह उसने आखिरी सांस ली। 
काबिले जिक्र है कि संवेदनहीनता की पराकाष्‍ठा को लाघंते रामलीला कमेटीवालों ने  अंकित के झुलस जाने के बाद भी रामलीला का मंचन जारी रहा था। यही नहीं ताड़का की भूमिका अंकित के चाचा के लड़के लव से कराई और उसे अस्‍पताल तक नहीं जाने दिया। 
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