रजनीश मिश्र बाराचवर (गाजीपुर) - मंगलवार को विजय दशमी के शुभ अवसर पर ब्लॉक मुख्यालय के स्थानीय गाव बाराचवर के रामलीला मैदान मे रामलीला कमेटी की तरफ से रामलीला का आयोजन किया गया। जिसे देखने के लिए हजारों कि तदाद मे दूर-दूर  से लोग आये थे। इस अतिप्राचीन रामलीला मे आकषर्ण का केन्द्र मुख्य रूप से तीस फिट बना  रावण का पुतला था । 
रामलीला देखने आये लोगों  मे राम रावण युद्ध को देखने के लिए काफी उत्साह था । वहीं दूर से आये लोगों ने बताया कि बाराचवर का रामलीला काफी मशहूर. रामलीला है ।   इस दिन का हम लोग बहुत दिनो से इंतजार करते है । वहीं रामलीला मे आये दुकानदारों ने बताया की  इस अति प्राचीन रामलीला मे आने के लिए हम लोग पहले से तैयारी शुरू कर देते है ।
रामलीला के ब्यास चिखुरपत पान्डेय ने राम रावण युद्ध के बारे मे बताया कि चौदह वर्ष वनवास के समय लक्ष्मण ने रावण कि बहन सूर्पनखा का नाक काट दिया था । इस अपमान का बदला लेने के लिए रावण ने श्री राम कि पत्नी सीता का हरण कर लिया और अपने साथ लंका लेकर चला गया ।इसकी जानकारी हनुमान से जब.राम को हुई तो माता सीता को छुड़ाने के लिए श्री राम हनुमान व सुग्रीव के साथ मिलकर लंका पर चड़ाई करते है ।
ब्यास ने बताया कि  कुभ कर्ण ने अपने बड़े भाई लंका पती रावण को समझात है लेकिन रावण माता सीता को राम के पास.नहीं भेजता है इसी कारण राम ने रावण का बध किया ।और माता सीता को छुड़ा लाय ।अधर्म पर धर्म का बिजय हुआ ।तभी से  रावण का पुतला दहन कर  बिजय दशमी हर्शोल्लास के साथ मनाई जाती है ।

रामलीला के आयोजक ब्रजेन्द्र सिंह ने बताया कि इस अतिप्राचीन रामलीला को देखने के लिए तीस चालीस गांव के लोग आते है ।रावण मेघनाद व कुभ कर्ण के किरदार को संजय पान्डेय विष्‍णुदेव  पान्डेय ,और सियालाल पान्डेय ने निभाया वहीं राम लक्ष्मण व सीता के रुप मे इस अतिप्राचीन रामलीला के परमपरा के ब्राह्मणो के कुवार लड़को ने निभाया । बाराचवर के अतिप्राचीन रामलीला मे मौजूद  बाराचवर के ब्लाक प्रमुख कौशल सिंह करिममुद्दिनपुर के थानाध्यक्ष रामलीला आयोजक ब्रजेन्द्र सिंह हिमांशु सिंह दीपक सिंह, मंटू सिंह   दयानन्द कुशवाहा व रामलीला कमेटी के सदस्य मौजूद थे ।
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