झरोखा न्‍यूज, अमृतसर : देश विभाजन से संबंधित दस्‍तावेज आज भी उन जख्‍मों को याद दिलाते हैं जिसे 70 साल पहले जिन्‍ना की जिद ने दिया था।  खास तौर से उनके जेहन में जो इस विभाजन की इस त्रासदी को झेल चुके हैं। कुछ ऐसे ही दस्‍तावेजों को सार्वजनिक करती हुई द आट़र्स एंड कल्‍चरल ट्स्‍ट नई दिल्‍ली की चेयरपर्सन किश्‍वर देसाई व सीईओ मल्लिका आहलुवालिया ने बताया कि 4 नंवबर 1947 को रेल मंत्रालय नई दिल्‍ली ने तत्‍कालीन प्रधान मंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू सहित अन्‍य अधिकारियों को प्रगति रिपोर्ट भेजी गई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि किस तरह से ईस्‍टर्न पंजाब रेलवे ने तीन दिनों में 33 हजार से अधिक पाकिस्‍तान जाने के इच्‍छुक मुस्‍लमानों को पाकिस्‍तान पहुंचाया।
जालंधर, लुधियाना व फाजिल्‍का से लाहौर भेजे गए थे रिफ़यूजी  
अमृतसर के टाउन हाल में बने पार्टिशन म्‍यूजियम में आईं संस्‍था की सीईओ ने देश के विभिन्‍न शहरों व नगरों से मिले दस्‍तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए 15 अगस्‍त 1947 की मध्‍य रात्र‍ि भारत से अलग हो गए एक नए राष्‍ट पाकिस्‍तान ने जन्‍म लिया, लेकिन उसके इस उदय के साथ ही कराेडो लोग प्रभावित हुए और पांच लाख से अधिक लोग हिंसा के शिकार हुए थे। उस दौरान 72 लाख से अधिक लोग पाकिस्‍तान से भारत आए और भारत से पाकिस्‍तान गए।
रेल मंत्रालय ने पं. जवाहर लाल नेहरू के दी थी रिपोर्ट
रेल मंत्रालय ने प्रधान मंत्री पं जवाहर लाल नेहरू और उप प्रधान मंत्री व रक्षा मंत्री सरदार बल्‍लभ भाई पटेल सहित अन्‍य अधिकारियों को 25 प्रतियों के अपने पत्र संख्‍या आरटी, 29,1 दिनांक 4 नवंबर 1947 में बताया है कि किस तरह रलवे ने तीन नवंबर को एक रेल तीन बार चला कर जालंधर सिटी से 15 हजार मुस्लिम रिफ़यूजियों को लाहौर पहुंचाया। इसी तरह एक ही रेल को तीन बार चला कर कुल 10200 मुस्‍िलम परिवारों को लुधियाना से फिरोजपुर व वहां से सड.क मार्ग से लाहौर भिजवाया। पांच नवंबर को भी सिंगल ट(ेन चला कर भिवानी खेड;ा, फाजिल्‍का, मेरठ व सहारनपुर से भी मुस्लिम परिवारों को पाकिस्‍तान पहुंचाने का उल्‍लेख किया गया है।
कानपुर से मिले पत्र ने बताई विस्‍थापितों की दशा
विभाजन के दौरान पाकिस्‍तान से विस्‍थापित हो कर भारत आए शरणार्थियों के लिए जारी किए गए एक पहचान पत्र को दिखाती हुई म्‍यूजियम की मैनेजर राजविंदर कौर ने बताया कि यह दिल्‍ली के किसी व्‍यक्‍ित ने उन्‍हें उपलब्‍ध करया है। यह पत्र कानपुर में बने शरणार्थी शिविर में रह रहे चुनी लाल भाटिया को कानपुर के तत्‍कालीन रिलिफ रिफ़यूजी अधिकारी ने 10:10:1949 में जारी किया था। इसमें एक महिला व तीन पुरुष व तीन बच्‍चों का उल्‍लेख किया गया है। इस पाकिस्‍तान के गुजरवाला से एक पिता ने विस्‍थापित हो कर दिल्‍ली पहुंचे अपने बेटे को पत्र लिखा है जिसमें उसने कहा कि यहां हालात ठीक नहीं हैं। बलवाई हिंदुओं को मार रहे हैं, अगर जिंदा रहा तो जल्‍द मिलूंगा।
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