करीमुद्दीपुर स्थित कष्‍टहरनी मंदिर के गेट पर लगाई गई सूचना।

कोरोना का कहर
इतिहास में यह पहला मौका, जब नवरात्रि पर माता दर्शनों से वंचित रहेंगे भक्‍त
७० साल में पहली बार नहीं लगेगा रामनौमी का मेला, चैता सुनने से महरूम रहेंगे लोग

रजनीश कुमार मिश्र छोटे,  बाराचवर (गाजीपुर) - कोरोना वायरस के चलते पूरे प्रदेश को लॉकडाउन कर दिया गया हैं। इस महामारी के चलते भीड़भाड़ वाली जगह पहले ही, लॉकडाउन कर दिए गए थें। इस महामारी के चलते मंदिरों के भी कपाट अब बंद कर दिए गए हैं। गाजीपुर के कुछ प्रमुख स्थानों मां कष्हरणी भवानी करीमुद्दीनपुर, कामाख्या धाम गहमर, रेवतीपुर और सती मां अमवां सिंह जैसे मंदिरों पर नवरात्रि में पूर्वांचल के साथ साथ बिहार के भी लोग आते हैं। इस महामारी के चलते इन प्रमुख मंदिरों के कपाट अगले आदेश आने तक बंद कर दिए गए हैं। यह इतिहास में पहला ऐसा मौका जब मंदिरों में भक्‍तों के प्रवेश और पूजा-अर्चना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। 

नवरात्र में भक्‍तों के लिए बन्द हुआ कष्टहरणी भवानी का कपाट
 मंदिर समिति के सदस्य राजू पान्डेय ने बताया कि शासन के आदेश व मंदिर समिति के सदस्यों के आपसी राय के बाद मंदिर के कपाट को 25 मार्च से लेकर 3 अप्रैल तक इस महामारी से बचाव के लिए बंद कर दिया गया हैं। वही मंदिर प्रशासन के अन्य सदस्यों ने बताया कि मंदिर के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब नवरात्र  में मंदिर के कपाट को भक्तों के लिए बंद किया गया हो, और यहां लगने वाले श्री रामनवमी के 70 साल पुराने मेले  को आगामी आदेश तक बंद किया गया हैं। करीमुद्दीनपुर थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह ने बताया कि मंदिर प्रशासन को इसकी  सूचना दे दिया गया था।
 स्थानीय व दूर से आए हुए दुकानदारों ने बताया कि इस महामारी के चलते रोजी रोटी के भी लाने अब पड़  गए हैं। क्योंकि इस महामारी के चलते मंदिर बंद होने से भक्त नहीं आएंगे जिसके वजह से दुकानें भी बंद रहेंगी और रोजी रोटी का संकट अब हम लोगों के सामने खड़ा हो गया है

सती धाम अमवा में भी नहीं होगा कोई आयोजन, लोगों के आने पर पाबंदी
 पूर्वांचल से लेकर बिहार तक मशहूर  जहां सांपों के काटे रोगी ठीक हो जाते हैं। वह स्थान अमवा के सती धाम के मंदिर को भी बंद कर दिया गया हैं। इस   सती स्थान पर चैत की नवरात्रि हो या सावन का माह  या अश्वनी माह का नवरात्रि हों हर समय भक्तों का रोज हजारों की भीड़ लगी रहती थी। लेकिन इस महामारी के चलते मंदिर के कपाट को मंदिर प्रशासन ने अग्रिम आदेश तक बंद रखने का निर्णय लिया हैं। मंदिर प्रशासन ने बताया कि यहां होने वाले सभी आयोजन रद्द कर दिया गया हैं।
मंदिर समीति को दे दी गई है शासनादेश की जानकारी : थानाध्‍यक्ष बरेसर
  बरेसर  थानाध्यक्ष संजय मिश्रा ने बताया कि मंदिर समिति को शासनादेश की  जानकारी दे दी गई है। किसी प्रकार का  कोई भी आयोजन नहीं किया जाएगा और ना ही दो से अधिक लोगों को एकत्र होने दिया जाएगा।  जब तक शासन की तरफ से अग्रिम आदेश ना हो।
गहमर स्थित कामाख्‍या मंदिर। यहां भी आम भक्‍तों के लिए प्रवेश वर्जित कर दिया गया है।

गहमर के कामख्या धाम में भी अगले आदेश तक भक्‍तों के आने पर मंदिर प्रशासन ने लगाई पाबंदी
 इसी तरह पौराणिक स्‍थलों में से एक गहमर के कामाख्‍या धाम में भी भक्‍तों के प्रवेश पर रोक लगाया दिया है।  इसकी पुष्टि थानध्‍यक्ष गहमर सहित मंदिर कमेटी के सदस्‍यों ने की है। इस कामाख्या धाम में प्रदेश के साथ-साथ बिहार के लोग भी दर्शन करने आते हैं।  नवरात्रि में यहां पूरे नौ दिन भक्तों की भीड़ लगी रहती थी। लेकिन कोरोना वायरस के चलते इस पौराणिक मंदिर को भक्तों के लिए बंद कर दिया गया हैं। यहां के पुजारी ने बताया कि इस महामारी के चलते ऐसा पहली बार हुआ हैं, जब नवरात्रि में मंदिर को भक्तों के लिए बंद करना पड़ा हैं।  इस महामारी के चलते यहां के सैकड़ों दुकानदार भुखमरी के कगार पर आ गए हैं।  गहमर थानाध्यक्ष ने बताया कि शासन के आदेश आने के बाद मंदिर प्रशासन को सूचना भेज दिया गया था। यहां होने वाले सभी आयोजनों को अब रद्द कर दिया गया है।  मंदिर आने वाले हर रास्ते पर बैरिकेडिंग कर नोटिस लगा दिया गया हैं। 
अमवा सिंह स्थित सती माता मंदिर मार्ग में बदं दुकानें और सुनसान पड़ा स्‍थान।
 दुकानदारों के सामने खड़ा हुआ संकट
- धार्मिक स्थानों पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों का कहना हैं। कि करोना जैसे संकट में हम छोटे दुकानदारों को भूखे मरने पर विवश कर दिया हैं। नवरात्री के लिए हम लोग प्रसाद लाए थे कि इससे हम दो पैसा कमा कर अपने परिवार का पेट पालेगें। लेकिन अब तो दुकानें बंद हो गई हैं, और हम लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया हैं। वहीं दुकानदार कृष्णानंद कुशवाहा ने बताया कि इस संकट की घड़ी में हम सारे दुकानदार देश के साथ खड़े हैं। भले ही हम लोगों का व्यापार चौपट हो जाये
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