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मंगलवार, 19 मई 2020

खत्म नहीं हो रही प्रवासी श्रमिकों की दुश्वरियां, नहीं मिल पा रहा आटा-दाल

  
मनोज दुबे, लुधियाना : प्रशासन के द्वारा भले ही दावा किया जा रहा हो कि प्रवासी श्रमिकों को राशन  और भोजन की दिक्कत नही आ रही है। लेकिन वो ही दावा धीमी -धीमी खोखला नजर आने लगा है। 
  बता दे कि  22 मार्च को  लाकडाउन और कर्फ्यू लागू होने से लुधियाना शहर के तमाम   अलग अलग एनजीओ व पुलिस प्रशासन की ओर से लंगर  व राशन   वितरण किया जा रहा था।  जिसके  वजह श्रमिक दो वक्त का भोजन कर सकते थे। लेकिन,  अब अप्रेल महीने सेे  हालात ऐसा हो चुका है । की कुछ एनजीओ  धीरे धीरे इस लंगर को चलाना बन्द कर दिये हैं। जबकि 1 लाख के  के करीब मजदूर अपने गांव की ओर भी जा चुुके हैं। अगर बात करे फोकल प्वाइंट बिजली दफ्तर के पास एक श्रमिक ने खुदकुशी कर ली थी। अगर सरकार इतना ध्यान देती तो ऐसा नोबत नही आती। अगर भोजन दिया भी जा रहा तो कुछ लोगो को दिया जा रहा तो उनके परिवार में पाँच परिवार है। तो थोड़ा सा भोजन देकर निकल जा रहे है।जिसके वजह से कुछ लोग इस आपदा की घड़ी में पैदल पलायन करने को मजबूर हो चुके है। और कुछ लोग भूखे सोने पर भी मजबूर हो रहे है।   टीम ने मंगलवार को सर्वे किया जहां पर शेरपुर इलाके में रहने वाले एक विकलांग अपने पत्नी और एक बेटा और दो बेटियो के साथ किराये के मकान में गुजारा कर रहे है। जिसमे विकलांग मोहमद बसिह, पत्नी रोजी खान, बेटा मोहमद ईशाद (8)  बेटी रोशनी (12)  जमीला (11) की है । ये परिवार सरकार से गुहार लगा रहे है। कि इन्हें पहले तो किसी तरह भोजन मिल जा रहा था। लेकिन अब न तो उन्हें भोजन मिल पा रहा है। और ना ही राशन जिसके चलते  वह परेशान है।
  उल्लेखनीय है कि यह परिवार काफी गरीब होने की वजह से  लाकड़ाऊंन से पहले दोनों पति -पत्नी फैक्टरी में काम करके घर खर्चा चला रहे  थे। लेकिन अब हालात यह हो चुका है। जिस फैक्ट्री में दोनों काम करते थे। वहां पर काम बंद है। काम की तलाश में किसी दूसरी फैक्ट्री में गए तो वो रखने को तैयार नही हो रहे । अब घर मे राशन और सिलेंडर भी खत्म हो चुका है। कुछ पैसे थे।  तो  उनकी पत्नी बीमार चल रही थी। तो वह इलाज करवाने में पैसे खर्च कर दिये ।   सरकार की ओर से गांव जाने के लिये जिला बिहार  भोजपुर के लिये 25 अप्रेल को रजिस्ट्रेशन करवाया था। तो वो  अभी तक मैसेज या फोन कुछ भी नही आ रहा । जिसके वजह से परेशान होकर किसी तरह अपना तो भूखे रहकर भी गुजारा कर रहे है। एक बेटा  और दो बेटी है तो वह भूख के कारण रो  रहे है। यह परिवार  शेरपुर  इलाके  किसी बेहड़े मे रहकर मोहमद बसिह  अपने परिवार के साथ रहते है।  विकलांग होने की वजह से बेहड़े में रहने वाले लोग ने तरस खाकर उनकी मदद करने में लगे है।  लेकिन जो बेहड़े में रहने वाले श्रमिक है । उनका भी फैक्ट्री चल भी रहा है तो अभी तक कुछ पैसे नही मील उनके पास भी राशन खत्म हो चुका है।  सिलेंडर भरा हुआ था वो भी अब खत्म हो चुका है।  
  मोहम्मद बसिह ने बताया कि पैर से विकलांग होने की वजह से चल नही पा रहे है पैर दर्द होता रहता है।  यह परिवार मूलरूप जिला भोजपुर बिहार गांव रतनाड़ के रहने वाले है। यहां पर पिछ्ले कुछ सालों से यहां पर रहते थे।

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